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‘Sons of Sardaar’ Poster: Ajay Devgn Pays Tribute to Battle of Saragarhi Warriors

‘संस ऑफ़ सरदार ‘ फिल्म पोस्टर में अजय देवगन सारागढ़ी योद्धाओं की लड़ाई के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं

ENGLISH

Ajay Devgn’s Sons of Sardar: The Battle of Saragarhi will be an epic, big-budget war film based on the 1897 battle between 21 Sikhs and 10,000 Afgans.

Devgn shared the first look of the film with a caption that read, “My tribute to Warriors of Saragarhi: A tale of Rage, of Love, of Bravery”.

Randeep Hooda will reportedly play the main lead in Ajay Devgn’s next production ‘Sons Of Sardaar: The Battle of Saragarhi’. The actor, who proved his acting finesse in ‘Sarbjit’, is said to be playing a Sikh soldier Havildar Ishar Singh. The film is based on a true story of the 19th century battle when around 12,000 Afghans attacked a British Indian Contingent, which also comprised of 21 Sikhs who went on to become the heroes of the mission. Randeep will learn sword fighting for the film and will be seen sporting a turban and a beard in the Rajkumar Santoshi directorial. Scroll down to know about Sanjay Dutt’s biopic…

Apparently, Devgn plans to make the epic Battle of Saragarhi into a 3D film. The VFX work on the film will be helmed by Devgn’s own company, called NY VFXWAALA named after his kids, Nysa and Yug which the actor set up in 2015.

Akshay Kumar’s look from Kesari (based on battle of Saragari) is out, and the film is scheduled to release in 2019 on the occasion of Holi. Much before Akshay, we saw Randeep Hooda’s look from a film based on the same historic event.

Ajay has moved on from The Battle Of Saragarhi and bears no ill will towards anybody. He understands that Akshay had his own reasons for doing the film and doesn’t blame him for doing the film. Akshay and Ajay have always shared a warm relationship. When Ajay was making Son Of Sardar he had gone to Akshay who had the title and Akki gave it away for free without a thought. The Battle Of Saragarhiwas Ajay’s dream project but he has accepted that others too are making films on the same subject and he will wait and watch out for the result. Akshay and  he share a cordial equation and by avoiding talk on a touchy subject completely, both stars avoided some tricky moments.”

The sequel, which is based on the historic Battle of Saragarhi which was fought before the Tirah Campaign on September 12 1897 between 21 Sikhs of the 36th Sikh Regiment (now the 4th Battalion of the Sikh Regiment) of British India, defending an army post, and more than 10,000 Afghan and Orakzai tribesmen.

HINDI

एक्टर अजय देवगन का कहना है कि 2012 में आई उनकी फिल्म ‘सन ऑफ़ सरदार’ का सीक्वल हॉलीवुड फिल्म ‘300’ की तरह होगा।फिल्म का सीक्वल सारागढ़ी की वीरगाथा पर आधारित है.

सारागढ़ी की ऐतिहासिक लड़ाई पर बेस्ड होगा.  सारागढ़ी युद्ध 21 बहादुर भारतीय सैनिकों की कहानी है.सारागढ़ी की ऐतिहासिक लड़ाई 12 सितंबर 1897 को तिराह मिशन के दौरान लड़ी गई थी. 36वीं सिख रेजीमेंट के 21 सैनिकों ने सारगढ़ी किले को बचाने के लिए 10,000 अफगान और ओराकजई कबायलियों से युद्ध लड़ा था.अजय इस फिल्म में 21 सैनिकों के साथ 10000 की फौज से लड़ने की ठान चुके हैं।  इस पूरी बैटेलियन ने 10,000 अफगानियों से लड़ते हुए अपनी जान की बाजी लगाई थी।

सारागढ़ी युद्ध 12 सितम्बर 1897 को ब्रिटिश भारतीय सेना और अफगानी सेना के बीच लड़ा गया था. यह युद्ध खैबर-पखतुन्खवा में हुआ था, जोकि अब पाकिस्तान में है. ब्रिटिश भारतीय सेना में सिख पलटन की चौथी बटालियन में 21 सिख थे, जिन पर 10 हजार अफगानी सैनिकों ने हमला किया था.इशर सिंह किसीभूखे शेर की तरह अफगानियो पर हमला कर रहे थे और निहत्थे ही उन्होंने 20 से अधिक  अफगानी सेनिको को मौत के घाट उतार दिया था |और उनके हतियार उठा कर अपने दोस्तों की तरफ फेक दिए इस तरह उन्होंने अफगानी सेनिको के काफी हथियार इकठे कर लिए |

अब सबसे पास दो दो बंदूके हो गयी थी और फिर वही हुआ दोनों हाथो से बंदूके चल रही थी बोले सो निहाल – सतश्री अकाल  के जकारे साथ हर जकारे के साथ ऐसा लगता था की उनकी शक्ति बढती जाती है और अफगानी सेना के लाशो के ढेर  बढ़ जाते | इस प्रकार लड़ते लड़ते सुबह से रात हो गयी पर सिखो ने अभी भी हार नहीं मानी थी |सारा दिन लड़ते लड़ते सिखो ने 700 से ज्यादा अफगानी सेनिको को मार गिराया था | लेकिन यह वास्तविक घटना थी. इस घटना ने भारतीयों को यह दिलाया कि हम भारतीय भी किसी से कम नहीं हैं.

इस बटालियन का नेतृत्व करने वाले हवलदार ईशर सिंह ने ऐसे मौके पर मरते दम तक लड़ने का फैसला लिया. इसे सैन्य इतिहास में इतिहास के सबसे महान अन्त वाले युद्धों में से एक माना जाता है. ब्रिटिश भारतीय सैनिक और अफगानी सैनिकों के बीच युद्ध के दो दिन बाद अन्य भारतीय सेना ने उस स्थान पर फिर से कब्जा जमा लिया था. सिख सैन्य कर्मियों द्वारा अब इस युद्ध की याद में 12 सितम्बर को सारागढ़ी दिवस के रूप में मनाते हैं.

यह 21 सिखो की कहानी जिन्होंने अपने बहादुरी के दम पर दुनिया के लिए एक मिसाल खड़ी करदी की अगर इरादे मजबूत हो तो इंसान कुछ भी कर सकता है.

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