in

Simmba movie review: Ranveer Singh lifts this Rohit Shetty blockbuster

सिम्बा फिल्म की समीक्षा: रणवीर सिंह ने रोहित शेट्टी की फिल्म को ब्लॉकबस्टर बना दिया है.

ENGLISH

Sangram Bhalerao has the word ‘Police’ tattooed on his forearm. This is not, as I first wondered, to remind the assistant commissioner what he does, but instead to exult in the power it gives him. Simmba, as he is nicknamed, grew up focussed on being a corrupt cop, and — played by a relentless Ranveer Singh— he appears to be loving it. Singh bites his lower lip while chasing crooks, as if turned on by his own valour, and walks with an odd crotch-first strut, as if a giant magnet is yanking his belt buckle, or his zipper.

This is a spinoff of Rohit Shetty’s alarmingly successful Singham movies, and I had called the first film “Devgnporn,” based on its fondness for crotch and caboose shots of its tight-trousered hero. In Simmba, with a cutesy title pointing out the cub of a lion king, Singh seems less concerned about his look than his feel. He embraces the trashy 80s-remake lunacy with gusto, creating a corrupt wisecracker more Deadpool than Devgn.

Singh beats people up as if he really, really wants to, and the dialogues fly out of his mouth as if he’s making them up. Most of these — like a play on the word ‘farz’ which can mean both duty and example, or when he calls someone his “bhai from another aai,” or turns a cop’s name into a song about drinking — earn solid laughs, and Singh’s glee is infectious as he bounds from scene to scene, simultaneously invincible and inflatable.

He then falls for Sara Ali Khan. It is love at first leer as the cop ogles the young girl from across the street. The actress is good here, attractive and atypical. I wish she had more to do, though, than dreamily talk about her late father, the legendary ‘encounter cop.’ Over and over again, she fetishizes the act of staged brutality.

The laughs dry up. Based on the Telugu potboiler Temper, Simmba takes an inevitable turn for the serious. This could have been disastrous, given how much Shetty telegraphs his actions. You can not only predict the inescapably horrid fate awaiting the local girl who Simmba starts calling his sister, but you know how the hero will kick the doors open or precisely when he’ll earn a salute from the honest policeman. Yet Singh dials up the intensity, cheeks a-quiver and invective punctuated by spittle, and the show stays compelling.

This is Shetty’s best work, a film of unflagging tempo with a genuinely charismatic lead, and while the actual story — about a bad cop who starts avenging rapes — isn’t interesting or original, Shetty keeps it entertaining, albeit longer than it should be. We can debate the need for these throwback films, and there is indeed a problem with the way rape is used as a trigger for the leading man to turn good, but, as it stands, Simmba is not only ahead of Singham, but far superior to Dabangg, the blockbuster that defines the genre.

Shetty plays at balance, giving decisive roles to female characters — judge, mother, policewomen — in a film that claims to be about rape, but this film is still all musk. Sonu Sood makes for an effective towering villain, while Singh pats his gun so long and hard that the film briefly turns into a Western. By the time Simmba meets his idol, the homoerotic energy is off the charts: two grunting men who look ready to tear each other’s uniforms off and throw down right there, drunk on their own testosterone.

HINDI

एक मनोरंजक-मसाला फिल्म को किस चीज की दरकार होती है? डांस, ऐक्शन, कॉमिडी , कैची वन लाइनर्स, रोमांस और एक जांबाज गुड लुकिंग हीरो की, जो वक्त पड़ने पर एक साथ 20-50 लोगों को धूल चटा सके। रणवीर सिंह की ‘सिम्बा’ भी टिपिकल रोहित शेट्टी स्टाइल की मसाला मूवी है, जिसमें ये सारे तत्व मौजूद हैं। फिल्म को अगर आप मनोरंजन के लिए देखेंगे, तो इंजॉय करेंगे, मगर यदि आप दिमाग लगाने की कोशिश करेंगे तो आपका मजा किरकिरा हो जाएगा।

फिल्म की कहानी तो वही पुरानी है कि कैसे एक भ्रष्ट पुलिस अफसर अपने साथ होनेवाली ट्रैजिडी के बाद ईमानदार पुलिस अफसर में तब्दील होकर अपने पुराने पाप धोना चाहता है। अनाथ सिंबा उर्फ संग्राम भालेराव ने बचपन में ही सीख लिया था कि पैसे कमाने के लिए पावर की जरूरत होती है और इसीलिए वह पुलिस अफसर बनने का रास्ता चुनता है। नाइट स्कूल में पढ़-लिखकर वह एक ऐसा पुलिस वाला बन जाता है, जो बेईमानी भी पूरी ईमानदारी से करता है।

ड्यूटी निभाते हुए उसका एक ही एजेंडा होता है कि वह जायज-नाजायज तरीके से पैसे हासिल कर सके। इसी बीच उसका तबादला गोवा में कर दिया जाता है। सिंबा खुश है कि उसे इस पोस्टिंग पर खूब पैसे उगाहने मिलेंगे, मगर वह नहीं जानता कि यहां आकर उसकी जिंदगी बदल जाने वाली है।

यहां उसे उसकी जिंदगी का प्यार शगुन (सारा अली खान) मिलती है, जो सिंबा की तरह अनाथ है और केटरिंग का काम करती है। यहां उसे आकृति जैसी मुंहबोली बहन, खुद्दार ईमानदार हेड कॉन्स्टेबल मोहिते (आशुतोष राणा), संतोष तावड़े (सिद्दार्थ जाधव) जैसा साथी मिलता है, जो उसे परिवार के होने का अहसास करवाता है। इसी के साथ उसका सामना वहां के जाने-माने डॉन धुर्वा रानाडे (सोनू सूद) से होता है, जो है तो एक फैमिली मैन, मगर सभी तरह के अवैध धंधे करता है। बहरहाल सिंबा को उससे कोई समस्या नहीं, क्योंकि वह सिंबा का मुंह पैसों से बंद कर देता है। फिर एक दिन धुर्वा के दो बदमाश भाई सिंबा की मुंहबोली बहन आकृति का न केवल निर्ममता से बलात्कार करते हैं बल्कि उसे जान से मार देते हैं। आकृति उनकी काली करतूतों की गवाह जो बन चुकी थी। बस उसी के बाद करप्ट पुलिस सिंबा का ट्रांसफॉर्मेशन होता है और वह न केवल आकृति के हत्यारों को सजा दिलाने का फैसला करता है, बल्कि ईमानदारी के रास्ते पर चलने की कसम खाता है। कहानी में डीसीपी बाजीराव सिंघम की नाटकीय एंट्री जैसे कई टर्न्स और ट्विस्ट आते हैं। क्या सिंबा बदला ले पाएगा और क्या वह सच्चाई की राह अपना पाएगा? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

रोहित शेट्टी के यह फिल्म यों तो ‘सिंघम’ की स्पिन ऑफ है, मगर हम आपको बता दें कि यह तेलुगू फिल्म टेंपर की आधिकारिक हिंदी रीमेक है। रोहित ने इसे मसालेदार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। फिल्म का फर्स्ट हाफ रोलर कॉस्टर राइड की तरह मालूम होता है, जहां कॉमिडी का तगड़ा डोज है। लार्जर देन लाइफ अंदाज में रणवीर की एंट्री है, मगर सेकंड हाफ में कुछ समय के लिए कहानी अपने ट्रैक से फिसलकर बलात्कार के ट्रैक पर आ जाती है, जिसे निर्भया के केस से जोड़कर रोहित ने मेलोड्रैमैटिक और प्रीची बना दिया है, मगर फिर अजय देवगन अपने धांसू अंदाज में आकर फिल्म को फिर ट्रैक पर ले आते हैं। रोंगटे खड़े करने वाले ऐक्शन दृश्य रोहित शेट्टी की स्ट्रेंथ होते हैं, जो यहां भी फिल्म को मजबूती प्रदान करते हैं। फरहाद समजी के वन लाइनर्स पूरी फिल्म में चुटीलेपन को बनाए रखते हैं। ऐक्शन दृश्य और रोहित फिल्म का क्लाइमैक्स दमदार है, जो अक्षय कुमार की सरप्राइज एंट्री के बाद सिंबा के सीक्वल का साफ संकेत देता है।
रणवीर सिंह को फिल्म की जान कहें, तो गलत न होगा। उन्होंने सिंबा मराठी एक्सेंट वाले फनी अंदाज में जिया है। उनकी चाल-ढाल, लुक, संवाद अदायगी और ऐक्शन का अंदाज दर्शकों को सीटियां बजाने पर मजबूर कर देता है। सारा अली खान रणवीर के साथ खूब जमी हैं, मगर उन्हें पर्दे पर ज्यादा समय दिखने का मौका नहीं मिला। धुर्वा रानाडे की भूमिका को सोनू सूद ने बहुत ही कमाल के अंदाज में निभाया है। उन जैसा पावरफुल विलन रणवीर जैसे हीरो को खूब टक्कर देता नजर आया है। ईमानदार पुलिस अफसर की भूमिका में आशुतोष राणा ने यादगार परफॉर्मेंस दी है। ठीक उसी तरह सिद्धार्थ जाधव ने दर्शकों का अच्छा मनोरंजन किया है। सहयोगी कास्ट भी शानदार हैं।
फिल्म के दो गाने ‘आंख मारे’, ‘तेरे बिन’ और ‘आला रे आला’ गाने खूब पसंद किए जा रहे हैं। मिर्ची टॉप ट्वेंटी में ‘आंख मारे’ नंबर फोर पर है ‘तेरे बिन” नंबर टेन पर है।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

The Accidental Prime Minister: Anupam Kher as former Prime Minister Dr. Manmohan Singh

‘The Legend of Maula Jatt’ trailer: Fawad Khan stars in tribute to Pakistani classic