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Kesari Movie Review: Akshay Kumar Plays a Fearless Warrior with Remarkable Zeal

केसरी मूवी रिव्यू: अक्षय कुमार ने रिमार्केबल के साथ एक निडर योद्धा की भूमिका निभाई.

ENGLISH

The trailer of Akshay Kumar Kesri, based on the incident from the Battle of Saragarhi, set the premise straight when Havildar Ishwar Singh(Akshay Kumar) says, “Bahar hum se kum das hazar hai or hm ekkis.A herculean  task by any stretch of imagination to win that battle but Singh could have been spelling out the formidable task that lay ahead for the film’s writers Anurag Singh and Girish Kohali as they set about encapsulating the battle of Saragarhi into the dictates of the Hindi film.

It was evident that the film based on true events from 1897 would be everything that happens to the 21 soldiers confined within the fort of Saragarhi outnumbered severely by the enemy outside.

One of the chief drawbacks of the urbane style of film-making is that in their attempt to layer stories with a subtle nuance, they lack the emotional flourish of the salt-of-the-earth flavouring required to sweep the mass audiences. Kesari takes the best of both styles and provides the story with heightened emotion that a film such as this requires. Backed with slick action and technical finesse, this one despite the barren landscape is visually rich, well justifying a theatre viewing.

Akshay Kumar shoulders the burden of pulling off this masterful telling of a folk tale with the suitable ease.He is gentle, authoritative, comic, sensitive and of course a fierce warrior all rolled in one and Kumar pulls each of with just the suitable degree of dramatic restraint.

Akshay in the film.And he pulls off, keeping that ‘kesri pagdi’ aloft till right the end, delivering  thundering speeches while keeping his men’s morale up.

His Ishwar Singh is inhabited and convincing, and convincing, and it helps that his punjabi accent is completely on point.

Finally, despite its predictable arcs,the outcome which we already know, stretched out length and clear alignment with nationalistic mood of nation, we stay with the film.

Only a handful of the Indian sepoys are allowed some leeway, and they add welcome nuance to the war film. One subtext in Kesari hinges on Bhola Singh (Rakesh Sharma), a Mazhabi Sikh sepoy who never smiles. Having faced caste oppression all his life, Bhola is an unhappy loner.

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HINDI
इतिहास गवाह है कि आत्मसम्मान और गौरव के लिए लड़ी गयी लड़ाइयो में भले ही जीत दुश्मन की हो, मगर ये वीरता की एक ऐसी गहरी छाप छोड़ जाती है कि सदियों बाद भी इन्हे याद किया जाता है. अक्षय कुमार की केसरी द बैटल ऑफ़ सारागढ़ी एक ऐसे ही युद्ध की दास्ताँ है जहा मात्रा 21 सिख जवानो ने 10 हज़ार अफगानो का न केवल लोहा लिया बल्कि उनके छक्के भी छुड़ाए। एक लम्बे अरसे से खिलाडी कुमार का रुझान देशभक्ति और मुद्दों की फिल्मो की और हुआ है.हॉलिडे, रुस्तम,एयरलिफ्ट, बेबी, टॉयलेट एक प्रेम कथा, पेडमेंन और गोल्ड जैसी फिल्मो के बाद अब होली केसरी फिल्म लेकर आये है.सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देशभक्ति की लहर जोरो पर है और इसका फिल्म को फायदा मिल सकता है.
फिल्म का फर्स्ट हाफ बहुत धीमा है। इंटरवल तक का समय निर्देशक अनुराग सिंह ने किरदारों को स्थापित करने में लगा दिया है। एक वॉर फिल्म होने के बावजूद असली कहानी मध्यांतर के बाद शुरू होती है, जब दस हजार अफगानी सारागढ़ी के 21 सिपाहियों पर हमला करते हैं। युद्ध के दृश्यों के स्टंट और कोरियॉग्रफी गजब की है और यह आपके रोंगटे खड़े कर देते हैं। अक्षय को ऐक्शन कुमार के नाम से भी जाना जाता है और निर्देशक ने इसमें हैरतअंगेज ऐक्शन परोसकर उनकी इमेज को खूब भुनाया है।
1897 के दौर को अंशुल चौबे ने अपनी समर्थ फटॉग्रफी से ऑथेंटिक बना दिया है, मगर इसमें सुब्रता चक्रबोर्ती और अमित रे के प्रॉडक्शन डिजाइन को भी श्रेय देना होगा। फिल्म का लुक परफैक्ट है, मगर स्क्रीनप्ले कमजोर है। संवाद जोशीले हैं, मगर कई जगह प्रीची लगने लगते हैं। क्लाइमेक्स गहरी छाप छोड़ जाता है। लुक और अभिनय के नज़रिये से ईश्वर सिंह के रूप में इसे अक्षय कुमार की सबसे सर्वोत्कृष्ठ परफॉरमेंस कहे तो गलत नहीं होगा।उन्होंने इंसानियत और वीरता के इमोशंस को पर्दे पर बेहतरीन ढंग से अंजाम दिया है.अक्षय ने अपनी संवाद अदायगी में सीखो द्वारा बोले जाने वाले लहजे को बहुत ही खूबसूरती से निभाया है.क्रेडिट में भले ही परिणीति चोपड़ा को स्पेशल गेस्ट के रूप में दर्शाया गया हो मगर उनका रोल इतना छोटा है कि न कोई असर छोड़ पता है और न ही रोमांटिक एंगल होने के नाते कोई राहत। अफगान सरगना के रूप में राकेश चतुर्वेदी ओम ने अच्छा काम किया है. सिख सिपाहियों के रूप में सभी कलाकारों ने ईमानदार परफॉरमेंस दी है.तनिष्क बागची के संगीत में रोमी और बृजेश शांधियला का गया हुआ गाना सानु कहंदी बहुत पसंद किया जा रहा है.
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Watch Exclusive Movie Review of KESARI: https://youtu.be/pJEadhgCuLA

 

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