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‘Housefull 4’ review: A film with dated comedy; relies on Akshay Kumar’s performance.

होउसेफुल्ल 4 मूवी रिव्यु: हंसी की फुलझड़ियां और ठहाकों के धमाके, मिले इतने स्टार।

ENGLISH

The very successful ‘Housefull’ franchise is back for a fourth instalment, and this time, instead of taking the story forward, it takes it back, 600 years back. ‘Housefull 4’ features the incomplete love stories of three couples from back in 1419. Six centuries later, the lovebirds are reincarnated.

With one minor twist: The couples are all mixed up. Can they discover this comedy of errors in time to ensure nobody ends up with a brother-in-law from the past life? Bala (Kumar) plays a a hairdresser from London who keeps getting f lashes from his past life. He, along with his brothers Roy (Deshmukh) and Max (Deol), have stumbled upon the bright idea of marrying the three daughters of a billionaire, which would help them pay off a mafia don whose loot money they misplaced. However, Bala realises the pairings are all wrong, and tries to convince his brothers that they must be set right. This ensures plenty of hilarity, dozens of mindless characters, and confusion galore.

Several of the jokes feel dated (no pun intended), not to mention crude and low-brow. Of the cast, Kumar’s character is the most fleshed out, gets all the best lines, and shoulders the film almost on his own.
Deshmukh gets to be his quirky self and also pulls in several laughs, but most of the supporting cast, as also the leading ladies, are just reduced to pointless cardboard additions to the film.

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HINDI
अपनी सुपरहिट फिल्मों की फ्रेंचाइजी को भुनाना कुछ गलत तो नहीं, मगर उनके नाम पर दर्शकों के सामने परोसा जानेवाला मसाला ऐसा जरूर होना चाहिए, जो उन्हें मनोरंजन की चटपटी रेसिपी दे सके। ऐसा कुछ हाउसफुल की फ्रेंचायजी भाग 4 में होता नजर नहीं आता। कुल मिलकार हाउसफुल 4 को पार्ट 3 की तर्ज पर गढ़ने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि कॉमिडी के कई नए-पुराने पंचेस के बावजूद कमजोर कहानी के कारण फिल्म हंसी का वो खजाना साबित नहीं हो पाती, जिसकी उम्मीद की गई थी।
अपने भूलने की आदत के कारण हेयरड्रेसर हैरी (अक्षय कुमार) खतरनाक माफिया डॉन माइकल (मनोज पाहवा) के पांच मिलियन डॉलर्स को कपड़े समझकर वाशिंग मशीन में धो देता है। बस तभी से माइकल हैरी और उसके दोस्त मैक्स (बॉबी देओल) और रॉय (रितेश देशमुख) की जान के पीछे पड़ जाता है। पैसों का जुगाड़ करने के लिए ये तीनों अरबपति ठकराल (रणजीत) की तीनों खूबसूरत बेटियों कृति (कृति सेनन), नेहा (कृति खरबंदा) और पूजा (पूजा हेगड़े) से शादी करने का प्लान बनाते हैं। शादी की रस्म के लिए जब ये विदेश से इंडिया के सितमगढ़ आते हैं, जब हैरी को याद आता है कि वह आज से तकरीबन 600 पहले अर्थात 1419 में सितमगढ़ का राजकुमार बाला देव सिंह था।
से यह बात उसका विश्वासपात्र नौकर पास्ता (चंकी पांडे) याद दिलाता है। जब हैरी को यह अहसास होता है कि इस जन्म में वे अपनी पूर्व जन्म की प्रेमिकाओं के बजाय अपनी पूर्व जन्म की भाभियों से शादी करने जा रहे हैं, तो वह अपने दोस्तों और उनकी प्रेमिकाओं को याद दिलाता है कि कैसे कृति पिछले जन्म में राजकुमारी मधु, रॉय नृत्य के गुरु बांगड़ू, मैक्स राजकुमारी का अंगरक्षक धरमपुत्र था और नेहा राजकुमारी मीना थी जबकि नेहा राजकुमारी माला थी। कहानी में पेंच तब आता है, जब पिछले जन्म के दो अन्य किरदार गामा (राणा दुगुबत्ती) पप्पू रंगीला और राघवन (शरद केलकर) भी इस जन्म में सितमगढ़ आ पहुंचते हैं। पिछले जन्म की अधूरी प्रेम और बदले की कहानी इस जन्म में पूरी हो पाती है या नहीं, ये तो आप फिल्म देखने के बाद ही जान पाएंगे।
निर्देशक फरहाद समसी ने कॉमिडी पैदा करने के लिए पुनर्जन्म और इस जन्म के किरदारों के बीच के कन्फ्यूजन का सहारा लिया। इसमें उन्होंने माइंडलेस कॉमिडी के साथ कई बचकाने पंच भी डाले हैं, जो अगर आप अतार्किक होकर देखें, तो आपको हंसाने में कामयाब रहती है, मगर पूरी तरह से बांधने में नाकाम। फर्स्ट हाफ बेहतर है, मगर सेकंड हाफ में कहानी झूलने लगती है। पंचेस अपना असर खो देते हैं। क्लाइमेक्स बेहद बचकाना है।
अभिनय के मामले में सभी कलाकारों ने अच्छा काम किया है। अक्षय कुमार दोनों ही किरदारों में हिलेरियस साबित हुए हैं। गंजे लुक में भी अपनी परफेक्ट कॉमिक टाइमिंग के कारण वे मनोरंजन करते हैं। रितेश देशमुख इस इस तरह के जनाना किरदारों में एक्सपर्ट हैं और उन्होंने अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है।
फिल्म का संगीत म्यूजिक लवर्स द्वारा पसंद किया जा रहा है। सोहेल सेन के संगीत में ‘एक चुम्मा’ गाना रेडियो मिर्ची के आठवें पायदान पर है, तो ‘बाला शैतान का साला’ तेरहवें पायदान पर।
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