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Amitabh Bachchan collaborates with Sairat director Nagraj Manjule for Jhund

अमिताभ बच्चन ‘सैराट’ फिल्म के डायरेक्टर नागराज मंजुले के साथ नई फिल्म ‘झुण्ड’ फिल्म में आ रहे है

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Jhund is 2019 Bollywood sports drama, which has been directed by Nagraj Manjule. The movie star Amitabh Bachchan in the lead role.

In Jhund, Amitabh Bachchan will be seen essaying the role of a retired sports teacher who starts a slum soccer movement.

The movie is produced by Bhushan Kumar, Krishan Kumar, Savita Raj, Raaj Hiremath and Nagraj Manjule.

Based on the life of Vijay Barse, a retired sports teacher who founded an NGO called Slum Soccer. He managed to rehabilitate street kids by keeping them off drugs and crime by turning them into soccer players and building a whole team.

According to the director, the film will also shed light on drug abuse and other crimes and explore how sports can reform children.Kumar and Bachchan are teaming up for the second time for a Bollywood project. Bachchan is currently riding high on the success of Umesh Shukla’s 102 Not Out and preparing for Bhramastra.

Amitabh Bachchan is all set to collaborate with Marathi ace filmmaker Nagraj Manjule, whose last film ‘Sairat’ was recently remade in Hindi as ‘Dhadak.

The language of the film would be best showcased in Nagpur hence I chose the lanes of that city,” Manjule said in a statement.Big B will be shown sharing field (and screen) space with real footballers. In Jhund, Bachchan plays a professor who builds a soccer team with street kids.

When Sairat (Unfettered) released two years ago, the film’s director Nagraj Manjule found himself in the middle of a pop-culture phenomenon. The tale of star-crossed lovers grossed more than one billion rupees ($15 million) at the box office – unprecedented for a Marathi film. The actors were mobbed, lines from the film are quoted verbatim even today, and it inspired the creation of a network to protect runaway couples in a country where marrying outside one’s caste is still taboo in many places.

The film was remade in Kannada, and Telugu, Tamil and Hindi versions are in the works. The Hindi remake, named Dhadak (Heartbeat), is being produced by Karan Johar and has Bollywood star kids Jhanvi Kapoor and Ishaan Khatter in the lead.

HINDI

मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने नागपुर में अपनी आगामी फिल्म ‘झुंड’ की शूटिंग शुरू कर दी है। मराठी ब्लॉक बस्टर ‘सैराट’ के निर्देशक नागराज की पहली हिंदी फिल्म …आकर्षण का केंद्र और नागपुर भौगोलिक दृष्टि से भारत का केंद्र। दो केंद्र मिल रहे हैं।

नागराज मंजुले के निदेर्शन में बन रही ‘झुंड’ कथित तौर पर स्लम सॉकर्स के संस्थापक विजय बारसे के जीवन पर आधारित है।नागराज मंजुले इस फिल्म को डायरेक्ट कर रहे हैं. ये उनकी पहली हिंदी फिल्म होगी. इससे पहले उनकी मराठी फिल्मों – ‘सैराट’ (2016) और ‘फैंड्री’ (2013) को आलोचकों ने बहुत अधिक सराहा था. ‘सैराट’ ने कमाई भी ढेर सारी की. मराठी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. सिर्फ 4 करोड़ के बजट में बनी और बिना स्टार वाली इस फिल्म ने 110 करोड़ की कमाई की. ये फिल्म तमिल, तेलुगु और कन्नड़ में रीमेक की गई. हिंदी में भी इसकी रीमेक बन चुकी है. करण जौहर ने प्रोड्यूस किया है, फिल्म का नाम है ‘धड़क’ जिसके साथ श्रीदेवी की बेटी जान्हवी और शाहिद कपूर के भाई ईशान कमर्शियल सिनेमा में लॉन्च किए जा रहे हैं.

बच्चन को लेकर मंजुले ने अभिव्यक्त किया है – “जब ‘दीवार’ (1975) फिल्म देखी तब अपनी शर्ट को गांठ मारकर स्कूल जाता था. टीचर की मार खाकर भी वो गांठ बनी रहती थी. दोस्त के मिट्टी ढोनेवाले गधों को चोरी से भगाकर ‘शोले’ का खेल रचाता था. हालांकि जिसके गधे थे, वही अमिताभ बनता था. उस खेल में, मैं सांभा बन कर भी खुश था. लेकिन खेल में दिग्दर्शन (direction) मेरा होता था. ‘याराना’ देखकर ‘कच्चा-पापड़, पक्का-पापड़’ बुलवाकर मैंने अपने गलीवालों को परेशान कर रखा था. ‘डॉन’, ‘कुली’, सत्ते पे सत्ता’, ‘शहंशाह’, ‘लावारिस’, ‘कालिया’, ‘शराबी’ न जाने कितनी फिल्मों की कहानियां सुनाकर मैं दोस्तों का मनोरंजन किया करता था. बचपन से जो मेरे सबसे पसंदीदा अभिनेता है, जिनकी फिल्में देखकर मैं बड़ा हुआ, वही सदी के महानायक आज मेरी अगली हिंदी फ़िल्म के नायक है. इससे बड़ी और ख़ुशी की बात क्या हो सकती है!”

फिल्म में अमिताभ बच्चन एक प्रोफेसर की भूमिका में होंगे जो सड़क पर रहने वाले बच्चों को फुटबॉल टीम बनाने के लिए प्रेरित करते हैं।

झुंड का निर्माण भूषण कुमार की टी-सीरीज, टी-सीरीज फिल्म्स के बैनर तले सविता राज हीरेमठ, मंजुले और तांडव फिल्म एंटरटेंमेंट लिमिटेड कर रही है। अमिताभ सुजॉय घोष की ‘बदला’ में भी नजर आएंगे जिसमें उनके साथ तापसी पन्नू होंगी।

ये एक स्पोर्ट्स मूवी है. सोशल ड्रामा है. ये झुग्गी के कुछ बच्चों से शुरू होती है. वो एक ऐसे आदमी से मिलते हैं जो उनकी जिंदगी बदलकर रख देता है. वो उनके हाथ में फुटबॉल थमा देता है और उनकी बुरी आदतों, निराशा, दिशाहीनता को दूर कर देता है. ये कहानी एक असल रिटायर्ड स्पोर्ट्स टीचर विजय बारसे की जिंदगी पर आधारित है.

जिन विजय बारसे पर बच्चन स्टारर ‘झुंड’ आधारित है उन्होंने 17-18 साल में बहुत सारे बच्चों की जिंदगी बदल दी. इनकी प्रेरणादायक कहानी साल 2001 में शुरू होती है. हालांकि बारसे इसे साल 2002 बताते हैं और उनके एक साथी 1999. ख़ैर, ये जुलाई का महीना था. गुरुवार का दिन. बरसात हो रही थी. बारसे नागपुर के हिसलॉप कॉलेज में स्पोर्ट्स इंस्ट्रक्टर थे. कॉलेज जा रहे थे लेकिन बरसात से बचने के लिए एक पेड़ के नीचे खड़े हो गए. तभी उन्होंने आसपास से आ रही कुछ सुहावनी आवाजें सुनी. पीछे मुड़े तो मैदान था जिसमें कुछ बच्चे खेल रहे थे. खिलखिला रहे थे. तन पर पूरे कपड़े नहीं थे. मैदान में कीचड़ जमा हो रहा था. लेकिन पड़ोस की झुग्गी के ये बच्चे खेल रहे थे. एक टूटी हुई बाल्टी से. किक मार रहे थे और खुश थे. इसे देखकर विजय ने कुछ सोचा और अपने कॉलेज गए. वहां अपने डिपार्टमेंट से एक असली फुटबॉल लेकर आए. उन बच्चों को दी और पूछा कि क्या तुम लोग फुटबॉल मैच खेलना चाहोगे? बच्चों ने कुछ बातचीत के बाद हां कर दी. फिर वो दूसरे इलाके में गए और दूसरे बच्चों से पूछा.

बारसे ने अपने कुछ परिचितों की मदद से स्लम सॉकर की स्थापना की. इसे प्यार से झोपड़पट्टी फुटबॉल कहकर पुकारा जाता था. इसका पहला मैच 2001 में हुआ. नागपुर की दो झोपड़पट्टियों के बीच – वसंतनाइक स्लम और धरमपेट गडगा स्लम के बीच. जब बारसे ने पहला सालाना स्लम सॉकर टूर्नामेंट करवाया तो उसमें बच्चों की 128 टीमों ने हिस्सा लिया. आज ‘स्लम सॉकर – क्रीड़ा विकास संस्था’ का कामकाज बहुत फैल गया है. सिर्फ महाराष्ट्र में ही बताया जाता है कि इसमें 2500 टीमें खेलती हैं. बताया जाता है कि बारसे की ये पहल, आज सीधे तौर पर 10 हजार से ज्यादा बच्चों की जिंदगी को प्रभावित करती है. भारत के कई राज्यों में. इनके इंटरैक्टिव प्रोगैम होते हैं जिसमें फुटबॉल के रास्ते बच्चों की लाइफ को बदलना शुरू किया जाता है. उनके अलग-अलग सब्जेक्ट्स को इम्प्रूव करने में भी मदद की जाती है. विदेशी स्कूली बच्चों और सेलेब्रिटीज़ को भी बुलाया जाता है और बच्चों से मिलवाया जाता है. इतने बरसों में स्लम सॉकर से जुड़कर बहुत सारे बच्चे निकले हैं जो आज सफल मुकाम तक पहुंचे हैं.

मंजुले का कहना है कि इस कहानी में वो ये भी दिखाएंगे कि कैसे झुग्गियों में पले बच्चों को ड्रग्स की आदतें हैं और अपराध की तरफ झुकाव है. और कैसे खेल उनकी जिंदगियों को सुधार सकता है. विजय बारसे की कहानी होने के बावजूद ये पूरी तरह उनकी बायोपिक है कि नहीं, ये इससे समझा जा सकता है कि राइटर-डायरेक्टर मंजुले ने स्क्रिप्ट ऐसे लिखी है कि इसमें बच्चन का कैरेक्टर विजय बारसे के किरदार जैसा नहीं लगेगा. वो काफी अलग ही नजर आएगा. मंजुले ने कहा है कि उन्होंने इस किरदार को उसके मूल स्त्रोत से बहुत दूर स्थित किया है. बावजूद इसके कि वे नागपुर जाकर बहुत बार बारसे से मिले हैं और उनसे उनकी लाइफ और इन फुटबॉल खेलने वाले बच्चों की कहानियों के बारे में पूछा है. ख़ैर, ‘झुंड’ का प्री-प्रोडक्शन शुरू हो चुका है. शूटिंग जल्द शुरू होने की संभावना है. फिल्म इस साल के आखिर में या 2019 के शुरू में रिलीज हो सकती है.

 

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