2.0 movie review: Rajinikanth is smarter than a smartphone, the film isn’t.

2.0 फिल्म समीक्षा: रजनीकांत स्मार्टफोन से ज्यादा स्मार्ट है, फिल्म उतनी है या नहीं


In this sequel 2.0, the battle is potentially fascinating: This film pits Rajinikanth versus the phones that give the actor all his power, via memes and ringtones and hashtags. Tragically, the villain we get is a birdbrain: an ornithologist who, angered by the injustice we do to birds with the radiation from our cellular phone towers, uses thousands of disembodied cellphones to create an… angry bird.

“Nice DP,” says Chitti when he comes face to face with the villain, unsubtly named Pakshiraja and played by Akshay Kumar. It is the right kind of response, for Kumar, despite seemingly insurmountable (and undefined) powers, never seems like a true threat once the Rajinikanths arrive on the scene. As if Dr Vasigaran and Chitti weren’t enough, the scientist now has a fembot sidekick, NILA (which stands for Nice Intelligent Lovely Assistant) and Kumar, despite growing in size, can’t quite measure up.

Shankar is all about the spectacle and India’s first film shot entirely in 3D doesn’t disappoint. There is too much eagerness to give everything in the foreground the 3D treatment — far too many objects are thrown at us — but that enthusiasm is natural, like the first time someone discovers portrait mode on the iPhone. Enthiran provided memorable visuals of interlocked Rajinikanths, however, and it isn’t easy to top that. This film does a lot, visually, and the idea of multiple phones wriggling in unison is suitably creepy. The render isn’t perfect and the opacity occasionally goes in and out, but the visual works impressively, and the 3D packs a punch.

2.0 is a linear, basic film, with an easy-to-identify and easy-to-extinguish problem, but coasts nicely on Rajini’s charm. The superstar is in vintage screen-dominating form, both as the efficient Vasigaran as well as Chitti, who later becomes a red-streaked version of himself, an obnoxious Oompa Loompa. Considering that Kumar too was a gentle, white-bearded conspiracy theorist who eventually turns into a squawking vulture-type, this may be the film’s way of telling us to beware of upgrades.

Shankar’s films are always grand in nature and they are laden with social messages for the society. In 2.0, it is about how humans misuse technology and make the world unfit for other living beings.

The sci-fi film is interesting in parts and does stay relevant despite the gap in between the beginning of its filming and its release date (2.0 began in 2015). Be it Nithyananda’s dialogues or the use of several punch lines, 2.0 entertains the audience. And most of these are mouthed by robot Nila, which gives it a nice twist.

2.0 moves in its own pace and the makers’ decision to actually stay away from the songs is a welcome change. While Rajinikanth doesn’t get any heroic incoming sequence, Akshay Kumar’s character does and the buildup to it looks interesting.

There is a flashback portion to ornithologist professor Pakshi Raja on why he became what he became. The entire portion was well shot, and is ably backed by Akshay Kumar’s performance.

The climax, that runs for over 20 minutes, is the talking point of the film. With incrdeble CGI effects and brilliantly choreographed stunt sequences, it is just a visual spectacle unfolding on screen.

Pakshi Raja explains how humans, birds and animals have to coexist to live a peaceful life. Though it is a much-need message, it could have been explained in an intriguing manner rather than the pedantic treatment it gets.

Another disappointing aspect is that the film does not really offer any deep solution to the problem that it is hinged on.

In a nutshell,2.0 is an enjoyable outing with several mass moments. However, it falls short of being a sci-fi film that has a strong story.

Shankar-directed 2.0 starring Rajinikanth and Akshay Kumar is a fun entertainer with brilliant visual effects. But the story turns predictable post intermission, says our review.

3 out of 5 stars for 2.0


साल 2010 में रजनीकांत और ऐश्‍वर्या राय की फ‍िल्‍म रोबोट ने द‍िखाया था क‍ि साइंस-फ‍िक्‍शन पर आधारित फ‍िल्‍मों का भारतीय स‍िनेमा में अच्‍छा फ्यूचर है। अब इस फ‍िल्‍म के 8 साल बाद इसका सीक्‍वल भी तैयार है और 2.0 के नाम से रिलीज हुआ है। डायरेक्‍टर एस शंकर की इस फ‍िल्‍म में एक बार फ‍िर रजनीकांत लीड रोल में हैं और रोबोट च‍िट्टी बनकर दर्शकों से मिल रहे हैं। वहीं फ‍िल्‍म में विलेन का रोल अक्षय कुमार कर रहे हैं और उनके लुक को इसके पहले पोस्‍टर से ही खासी चर्चा मिली है। फ‍िल्‍म के VFX भी शानदार बताए जा रहे हैं। गौर हो कि फिल्म में 3 हजार तकनीशियन ने काम किया है।

हालांक‍ि हिंदी बेल्‍ट में इस फ‍िल्‍म का उतना क्रेज नहीं द‍िख रहा लेकिन साउथ बेल्‍ट और सिंगापुर, मलेश‍िया जैसे देशों में फ‍िल्‍म की बुकिंग जोरदार होने की खबरें हैं। वहीं रिपोर्ट्स बता रही हैं क‍ि पाकिस्‍तान में भी 2.0 को लेकर खासा उत्‍साह है।

अक्षय कुमार का रोल काफी जबरदस्त रखा गया है। फिल्म शुरू होती है एक ही रजनीकांत से मगर जल्द ही चिट्टी के एंट्री होने के बाद दो रजनीकांत अक्षय कुमार के किरदार पक्षीराजन से लड़ने लगते हैं। फिर ऐसा वक़्त आता है के 500 और रोबोट्स क्रिएट हो जाते हैं यानी 500 और रजनीकांत। क्लाइमेक्स सन में हज़ारों अक्षय कुमार आ जाते हैं। और फिर लाखों रजनीकांत भी। अक्षय कुमार का चेहरा केवल इंटरवल पॉइंट पर पहली बार दिखायी देता है। मगर फिल्म के दुसरे हाफ में सिर्फ अक्षय ही अक्षय हैं.

फिल्म में अक्षय विलन क्यों बनते हैं इसका काफी जस्टिफिकेशन भी दिया गया है। बिलकुल उसी तरह जिस तरह से फिल्म धूम 3 में आमिर खान का किरदार नेगेटिव हो जाता है। गौरतलब है की फिल्म के पहले ही सीन में अक्षय की मौत हो जाती है और फिल्म के बाकी हिस्सों में उनकी आत्मा, औरा या फिर भूत ही कह लीजिये समा जाती है।

फिल्म 2.0 न तो रजनीकांत की फिल्म है और न ही अक्षय कुमार की। अगर फिल्म है तो निर्देशक शंकर की। हर एक शॉट, हर एक फ्रेम, हर एक लम्हा, फिल्म में डायरेक्टर की बनाई हुई है और फिल्म में केवल उनकी ही छाप है। फिल्म में हर पांच में से चार सीन VFX से भरपूर है। हर एक बारीकी पर काफी ध्यान दिया गया है। क्यूंकि फिल्म में इमोशनल क्वॉटेंट की कमी है। शंकर ने कुछ कॉमेडी सीन्स से फिल्म को सजाया है। जहां कुछ सीन्स फ्रंट बेंचर्स के लिए हैं, कुछ डायलॉग्स क्लासेज को देखकर बुना गया है।

फिल्म में ए आर रहमान का संगीत तो इस्तेमाल हुआ है मगर गाने केवल दो हैं। एक तब जब अक्षय को एक ओर्निथोलॉजिस्ट (पक्षी विज्ञानी) का बैकग्राउंड दिखाया जाता है तब वहां पर एक इमोशनल ट्रैक है और दूसरा गाना जो टिपिकल फ़िल्मी आइटम नंबर है। वह फिल्म के आखिर में एन्ड क्रेडिट्स में इस्तेमाल हुआ है।

अक्षय कुमार के अलावा सुदंशु पांडेय, आदिल हुसैन और कुछ हिंदी कलाकार अपने डायलॉग्स हिंदी में बोलते नज़र आते हैं। इसका मतलब है की फिल्म में इनके डायलॉग्स दो बार शूट किये गए हैं ताकि हिंदी दर्शक को भी यह फिल्म देसी लगे। अक्षय की इस फिल्म में एक लाइन तमिल में भी है, जिसका वह बहुत ही बुरी तरीके से उच्चारण करते हैं। कुल मिलाकर यह फिल्म बेहद मनोरंजक है और देखते वक्त आपकी पलकें बिल्कुल नहीं झपकेंगी।

टेक्निकल डिपार्टमेंट ने माइंडब्लोइंग काम किया। 35 मिनट के आस पास का क्लाइमेक्स फिल्म का हाई पॉइंट है। इस साल के सबसे उम्दा वी एफ एक्स के चलते फिल्मएक विसुअल मास्टरपीस है। फिल्म के एक्शन स्टंट्स भी अजब गजब हैं। साउंड डिपार्टमेंट और आर्ट डायरेक्शन भी टॉपनॉच है। फिल्म में लगाया एक एक पैसा वसूला गया है ताकि फिल्म उतनी ही भव्य लगे जितनी महंगी बताई जा रही है। मेकअप खासकर अक्षय का मेकअप बहुत ही ज़बरदस्त है।

कहानी सबसे बड़ी प्रॉब्लम है, और बीच बीच मे ज्ञान बांटने की कोशिश की जा रही है। वाइल्ड लाइफ को बचाने से लेकर साइबर वर्ल्ड में जीने के हैल्थ हैजर्ड विस्तार से बताए गए हैं। वीक स्क्रिप्ट के चलते फिल्म कई जगह पर बोर करती है, क्योंकि जहां ज्ञान बांटा जा रहा है वहां तो सब वैसे ही ज्ञानी हैं।

मेकअप के लेयर के नीचे वैसे ही एक्सप्रेशन दिखते नहीं है। रजनीकांत और अक्षय दोनों ही अपने काम को बखूबी करते हैं। एमी जैक्सन को फाइनली अपने कैलिबर का रोल मिल गया। वो इस फिल्म में भी एक्सप्रेशनलेस रोबोट बनी हैं।

कुलमिलाकर ये फिल्म हॉल में जरूर देखिए, भले ही कहानी दोयम दर्जे की हो पर फिल्म हॉल में देखकर पैसा जरूर वसूल हो जाएगा।

फिल्म की कहानी कुछ खास या अनोखी तो नहीं है लेकिन डायरेक्टर एस शंकर के डायरेक्शन, स्टनिंग वीएफएक्स, अमेजिंग 3डी इफैक्ट्स, पिक्चराइजेशन, बैगग्राउंड स्कोर, एक्शन, कोरियोग्राफी इस फिल्म को धमाकेदार बना देती है। खासतौर पर चिट्टी और चिड़िया के बीच की लड़ाई जो देखने में बहुत दिलचस्प है।

फिल्म में अभिनय की बात करें तो रजनीकांत फिल्म की जान हैं। उन्होंने एक एलेक्ट्रिफ्यिंग परफॉरमेंस दी है। चिट्टी की दमदार वापुसी लोगो को खूब पसंद आएगी। अक्षय कुमार का ग्रे शेड वाला लुक बेहद शानदार है। उन्होंने ब्रिलियंट पेर्फोर्मस दी है। एमी जैक्सन के पास काफी कम डॉयलॉग्स थे  लेकिन पहली बार किसी फिल्म में उन्होंने अच्छा काम किया और वो काफी खूबसूरत दिखी हैं।फिल्म में कई सीन्स हॉलीवुड से इंस्पायर्ड है और आपको फुल हॉलीवुड की फील देनी की कोशिश करी है | लेकिन ये फिल्म पहले पार्ट जितनी मजेदार नहीं है।


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